
लहसुन की खेती के लिए बीज दर और बुवाई का सही समय
लहसुन की खेती में सही समय पर बुवाई और उचित बीज दर का उपयोग करने से उत्पादन में वृद्धि होती है।
लहसुन की खेती में बुवाई का सही समय
लहसुन की खेती के लिए बुवाई का सबसे उपयुक्त समय सितंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर नवंबर के अंत तक होता है। इस अवधि में बुवाई करने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और उत्पादन में वृद्धि मिलती है।
लहसुन की खेती के लिए उर्वरक प्रबंधन
खाद एवं उर्वरकों की मात्रा मिट्टी की उर्वरता पर निर्भर करती है। सामान्यतः प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद का उपयोग करना चाहिए।
- नत्रजन – 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- फास्फोरस – 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- पोटाश – 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
इसके लिए लगभग 109 किलोग्राम डीएपी, 175 किलोग्राम यूरिया और 84 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश की आवश्यकता होती है।
उर्वरक देने की विधि
- गोबर की खाद, डीएपी और पोटाश की पूरी मात्रा अंतिम जुताई के समय मिट्टी में मिलाएं।
- यूरिया की आधी मात्रा खेत की तैयारी के समय दें।
- शेष यूरिया की मात्रा 30–40 दिन बाद खड़ी फसल में दें।
सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबंधन
फसल की अच्छी वृद्धि के लिए जिंक सल्फेट @ 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 3 साल में एक बार उपयोग करना चाहिए।
ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन
ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन का उपयोग करने से लहसुन की पैदावार बढ़ती है। जल घुलनशील उर्वरकों का उपयोग ड्रिप सिंचाई के माध्यम से करना लाभकारी होता है।
सामान्य प्रश्न
लहसुन की बुवाई का सही समय क्या है?
लहसुन की बुवाई का सही समय सितंबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के अंत तक माना जाता है।
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