
लहसुन की फसल में निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण
लहसुन की खेती में निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण से पौधों की वृद्धि और उत्पादन में सुधार होता है।
लहसुन की खेती में निराई-गुड़ाई का महत्व
लहसुन की फसल में खरपतवार नियंत्रण और निराई-गुड़ाई बहुत महत्वपूर्ण होती है। खरपतवार पौधों के साथ पोषक तत्व, पानी और धूप के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं जिससे फसल की वृद्धि प्रभावित होती है।
निराई-गुड़ाई का सही समय
लहसुन की फसल में पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के लगभग 25–30 दिन बाद करनी चाहिए। दूसरी निराई-गुड़ाई 45–50 दिन के बाद करनी चाहिए। इससे पौधों की जड़ों में हवा का संचार बेहतर होता है और पौधों का विकास तेज होता है।
रासायनिक खरपतवार नियंत्रण
खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित रसायनों का उपयोग किया जा सकता है:
- प्लुक्लोरोलिन @ 1 किलोग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर बुवाई से पहले
- पेन्डीमेथालीन @ 1 किलोग्राम सक्रिय तत्व बुवाई के 48 घंटे के अंदर
इन रसायनों को लगभग 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए।
खरपतवार नियंत्रण के लाभ
- फसल की बेहतर वृद्धि
- पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है
- उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि
- पौधों की जड़ों का बेहतर विकास
सामान्य प्रश्न
लहसुन की फसल में पहली निराई-गुड़ाई कब करनी चाहिए?
लहसुन की फसल में पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के लगभग 25–30 दिन बाद करनी चाहिए।
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