
चने की फसल में उचित मात्रा में खाद और उर्वरक प्रबंधन
चने की फसल में अधिक उत्पादन के लिए मृदा परीक्षण के अनुसार संतुलित खाद और उर्वरकों का उपयोग करना आवश्यक है।
चने की खेती में उर्वरक प्रबंधन का महत्व
चने की फसल से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए खाद और उर्वरकों का उपयोग मृदा परीक्षण के अनुसार करना चाहिए। इससे पौधों का विकास बेहतर होता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।
नाइट्रोजन स्थिरीकरण की भूमिका
चने के पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु पाए जाते हैं। ये जीवाणु वायुमंडल से नाइट्रोजन को अवशोषित करके पौधों की वृद्धि में सहायता करते हैं।
मुख्य उर्वरकों की मात्रा
चने की फसल में निम्नलिखित उर्वरकों का उपयोग लाभकारी होता है:
- नाइट्रोजन – 20 से 25 किलोग्राम प्रति एकड़
- फास्फोरस – 50 से 60 किलोग्राम प्रति एकड़
- पोटाश – लगभग 20 किलोग्राम प्रति एकड़
- सल्फर – लगभग 20 किलोग्राम प्रति एकड़
फसल की असिंचित अवस्था में पोषण
वैज्ञानिक शोध के अनुसार यदि फसल असिंचित अवस्था में हो तो लगभग 2% यूरिया या डीएपी का छिड़काव करने से उत्पादन में वृद्धि होती है।
सामान्य प्रश्न
चने की फसल में कौन से उर्वरक उपयोगी होते हैं?
चने की फसल में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर का संतुलित उपयोग उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है।
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